संवाददाता: सचिन कुमार
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार तैयारियों में जुटी हुई है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा मार्ग पर चलने वाले घोड़े-खच्चरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे विशेष इंतजामों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार इस बार चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं के साथ-साथ बेजुबान पशुओं की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि यात्रा शुरू होने से करीब दो महीने पहले ही उन गांवों में हेल्थ और रजिस्ट्रेशन कैंप लगाए गए थे, जहां से घोड़े-खच्चर यात्रा के लिए लाए जाते हैं।
बीमार और वृद्ध पशुओं पर पूरी तरह प्रतिबंध
सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार ने बीमार, चोटिल और अधिक उम्र वाले पशुओं को यात्रा में शामिल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। हर पशु के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना या परेशानी से बचा जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल यात्रियों को सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन पशुओं का भी संरक्षण करना है जो कठिन पर्वतीय मार्गों पर सेवा देते हैं।
2022 की तुलना में घटी मृत्यु दर
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की सख्त नीतियों और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है। वर्ष 2022 की तुलना में इस बार पशुओं की मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि केदारनाथ और यमुनोत्री धाम में विशेष “म्यूल टास्क फोर्स” (Mule Task Force) तैनात की गई है। यह टीम लगातार निगरानी कर रही है कि घोड़े-खच्चरों को समय पर आराम, पर्याप्त पानी और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहें।
पशुपालन मंत्री ने भी दिए निर्देश
उत्तराखंड के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भी अधिकारियों को यात्रा के दौरान पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का दावा है कि इस बार चारधाम यात्रा को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और पशु हितैषी बनाया गया है।


