रिपोर्ट: भगवान सिंह
देवप्रयाग: जनपद टिहरी गढ़वाल के देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां कैलापीर देवता की तीन दिवसीय पूजा विधिवत रूप से संपन्न हुई। कार्यक्रम का आयोजन प्राचीन मेला स्थल डाडापानी कैलापीर मंदिर में भक्ति और श्रद्धा के साथ किया गया।
प्राचीन परंपरा और बढ़ती भव्यता
अप्रैल माह में आयोजित होने वाला यह मेला हिंडोलाखाल ब्लॉक की विशेष पट्टी का एक ऐतिहासिक और पारंपरिक आयोजन माना जाता है। इस वर्ष मंदिर के भव्य निर्माण के बाद मेले की रौनक पहले से कहीं अधिक बढ़ी नजर आई।
ग्राम सभाओं—कफलड, उछा और त्याड सहित कई गांवों के सहयोग से बने इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
“डंडा पानी यात्रा” बनी आकर्षण का केंद्र
मेले का प्रमुख आकर्षण “डंडा पानी यात्रा” रही, जिसमें श्रद्धालु कई किलोमीटर लंबी पदयात्रा कर मंदिर स्थल तक पहुंचे। इस दौरान देवता के पश्वा, नेजा-निशान और ढोल-दमाऊं की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
जनप्रतिनिधियों और समिति का योगदान
मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंदन सिंह रतकली, सचिव रविंद्र सिंह चंद और मुख्य सलाहकार राजेंद्र सिंह चंद ने मंदिर निर्माण में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं और श्रमिकों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें सम्मानित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, जिला कांग्रेस कमेटी देवप्रयाग के अध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल ने कहा कि ऐसे मेले हमारी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों को मंदिर निर्माण के लिए बधाई दी और मंदिर तक सड़क निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सैकड़ों श्रद्धालुओं की रही मौजूदगी
इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, पुजारीगण, बाजगीर समुदाय और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कई स्थानीय गणमान्य लोगों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे आयोजन और भी भव्य बन गया।


