गोलज्यू देवता की शोभायात्रा हल्द्वानी पहुंची, श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

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संवाददाता: ललित जोशी

देवभूमि उत्तराखंड में आस्था और विश्वास का प्रतीक माने जाने वाले न्यायकारी देवता गोलज्यू महाराज की भव्य शोभायात्रा चंपावत जनपद से विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए हल्द्वानी पहुंची। यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर गोलज्यू देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया और शोभायात्रा में शामिल होकर पुण्य अर्जित किया।

शिक्षिका सुनीता जोशी ने मोबाइल फोन के माध्यम से जिला संवाददाता ललित जोशी को जानकारी देते हुए बताया कि गोलज्यू देवता की यह पावन यात्रा चंपावत से प्रारंभ होकर टनकपुर, किच्छा होते हुए हल्द्वानी पहुंची। यात्रा के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और कई स्थानों पर भक्तों के लिए पेय पदार्थ, फल एवं प्रसाद का वितरण किया गया।

सुनीता जोशी ने कहा कि गोलज्यू देवता केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे हिन्दुस्तान में न्याय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति हर ओर से निराश हो जाता है, तब वह न्याय की गुहार लेकर गोलज्यू देवता के मंदिर पहुंचता है और अपनी विनती उनके समक्ष रखता है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित गोलज्यू मंदिरों में श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। पहले जिन भक्तों के लिए मंदिर पहुंचना संभव नहीं होता था, वे अपनी समस्या पत्र के माध्यम से भेजते थे। मान्यता है कि गोलज्यू देवता भक्तों की विनती सुनकर उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं।

विशेष रूप से चितई गोलज्यू मंदिर और घोड़ाखाल गोलज्यू मंदिर में आज भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा भेजे गए विनती पत्र और चढ़ाए गए घंटियां देखी जा सकती हैं। मान्यता है कि मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त मंदिरों में घंटियां चढ़ाते हैं, जिसके चलते इन मंदिरों में हजारों घंटियां बंधी हुई हैं।

सुनीता जोशी ने कहा कि आधुनिक समय में जहां बाजारों में रेडीमेड सजावटी सामग्री और स्टिकर का प्रचलन बढ़ गया है, वहीं इस आयोजन में पारंपरिक गेरू मिट्टी और चावल से विस्वार बनाकर गोलज्यू देवता की वेदी और धूनी को सुंदर ढंग से सजाया गया, जिसने लोगों को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का कार्य किया।

उन्होंने विश्वास जताया कि आज के आधुनिक युग में भी लोगों की आस्था गोलज्यू देवता के प्रति अटूट बनी हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को पुराणों में देवभूमि कहा गया है और यह वास्तव में देवी-देवताओं की भूमि है, जहां आज भी श्रद्धा और संस्कृति जीवंत रूप में दिखाई देती है।

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