रिपोर्ट: ललित जोशी
नैनीताल के धारी विकासखंड के पहाड़पानी गांव के रहने वाले कमलेश महतोलिया आज आत्मनिर्भर भारत की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुके हैं। उन्होंने अपनी मेहनत, नवाचार और सरकारी योजनाओं के सहयोग से बंजर जमीन को फूलों और फलों की उन्नत खेती में बदल दिया है।
नौकरी छोड़ गांव लौटे, शुरू की नई राह
इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद कमलेश ने गुजरात में नौकरी की, लेकिन गांव और परिवार से जुड़ाव उन्हें वापस अपने घर ले आया। गांव लौटकर उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने का फैसला किया।
सरकार की योजना बनी मजबूत आधार
कमलेश को उत्तराखंड सरकार की उद्यान विभाग योजना के तहत लगभग 14 लाख रुपये का ऋण मिला। इस आर्थिक सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन ने उनके सपनों को साकार करने में अहम भूमिका निभाई।
10 नाली से 40 नाली तक का सफर
शुरुआत में कमलेश ने 10 नाली भूमि पर फूलों की खेती शुरू की, जो आज बढ़कर 40 नाली तक पहुंच चुकी है।
वे वर्तमान में उगा रहे हैं:
- लिलियम फूल
- ओरिएंटल प्रजातियां
- एशियाटिक फूल
इन फूलों की मांग नैनीताल समेत अन्य जिलों में तेजी से बढ़ रही है।
फल उत्पादन से बढ़ाई आय
कमलेश ने अपने व्यवसाय को और मजबूत करते हुए:
- 30 नाली भूमि पर सेब
- कीवी
- स्ट्रॉबेरी
जैसी नगदी फसलों की खेती भी शुरू की है, जिससे उनकी आय में बड़ा इजाफा हुआ है।
हर महीने 2 लाख की कमाई, 10 लोगों को रोजगार
आज कमलेश:
- 8 से 10 स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहे हैं
- सभी खर्च निकालने के बाद करीब 2 लाख रुपये प्रति माह की आय अर्जित कर रहे हैं
मुख्यमंत्री को दिया श्रेय
कमलेश ने अपनी सफलता का श्रेय पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और राज्य सरकार की योजनाओं को दिया। उनका कहना है कि सरकारी सहयोग के बिना इस स्तर तक पहुंचना संभव नहीं था।
युवाओं के लिए प्रेरणा
कमलेश की सफलता यह साबित करती है कि:
- सरकारी योजनाओं का सही उपयोग
- नई तकनीकों को अपनाना
- और मेहनत
किसी भी युवा को आत्मनिर्भर बना सकती है।
वे आने वाले समय में अपने व्यवसाय का विस्तार कर आधुनिक तकनीकों के जरिए उत्पादन और मार्केटिंग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की योजना बना रहे हैं।


