रिपोर्ट: अरशद हुसैन
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में मोहर्रम से पहले ताजियों की ऊंचाई नापने के दौरान हुए एक विवाद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। मामला पुलिस अधिकारी द्वारा कथित रूप से जूते पहनकर ताजिया नापने से जुड़ा है, जिसके बाद वीडियो वायरल होने पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, मोहर्रम की तैयारियों के तहत पुलिस प्रशासन की टीम ताजियों की ऊंचाई की जांच करने पहुंची थी। इसी दौरान एसपी ग्रामीण अनुज चौधरी पर आरोप लगा कि उन्होंने ताजिया नापते समय जूते नहीं उतारे, जिसे लेकर कुछ लोगों में नाराजगी देखी गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया।
विपक्ष का हमला, सरकार पर लगाए आरोप
इस मामले को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। विभिन्न विपक्षी दलों ने सरकार पर अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है।
मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने कर्तव्यों के बजाय सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं और यह स्थिति चिंता का विषय है।
काजी निजामुद्दीन ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की मानसिकता केवल “हिंदू-मुस्लिम राजनीति” तक सीमित हो गई है। उनके अनुसार, वर्दीधारी अधिकारियों द्वारा धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान न करना समाज में गलत संदेश देता है और इससे जनता का भरोसा कानून व्यवस्था पर कमजोर हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए, क्योंकि यदि अधिकारी ही मर्यादा का पालन नहीं करेंगे तो इसका असर सामाजिक सौहार्द पर पड़ेगा।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



