Sunday, October 25, 2026
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गढ़वाली फिल्म ‘ढोली’ ने रचा इतिहास, पहली बार उत्तराखंड को मिला यह गौरव

रिपोर्टर: सचिन कुमार

देहरादून: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में गढ़वाली फीचर फिल्म ‘ढोली’ को राष्ट्रीय सम्मान मिलने के साथ ही उत्तराखंड के क्षेत्रीय सिनेमा ने नया इतिहास रच दिया है। पहली बार उत्तराखंडी बोली में बनी किसी फीचर फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। इस उपलब्धि ने न केवल फिल्म जगत बल्कि पूरे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है।

फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक दिनेश पी. भोंसले ने किया है। यह फिल्म प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. नंदकिशोर हटवाल की चर्चित कहानी ‘जमनदास ढोली’ पर आधारित है। पुरस्कार के तहत निर्माता और निर्देशक को रजत कमल और दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।

‘ढोली’ उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और ढोली समुदाय के जीवन संघर्ष को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है। सदियों से यह समुदाय ढोल-दमाऊं की थाप के माध्यम से देव संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवित रखता आया है। फिल्म इसी विरासत को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से सामने लाती है।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद का मानना है कि यह सम्मान राज्य के फिल्म उद्योग के लिए नए अवसर लेकर आएगा। परिषद के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान के अनुसार, इससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और फिल्म निर्माताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

नई फिल्म नीति के बाद उत्तराखंड तेजी से फिल्म निर्माण का पसंदीदा केंद्र बन रहा है। ऐसे में ‘ढोली’ की सफलता आने वाले वर्षों में गढ़वाली और कुमाऊंनी सिनेमा के लिए नई राह खोलने वाली उपलब्धि मानी जा रही है।

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