रिपोर्ट: आसिफ इक़बाल
कॉर्बेट लैंडस्केप के चर्चित नर बाघ ‘भोला’ को वन विभाग ने देर रात सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया। पिछले कई दिनों से यह बाघ घायल अवस्था में जंगल में देखा जा रहा था। लगातार निगरानी के बाद विशेषज्ञों की टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से ट्रेंकुलाइज कर ढेला रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया, जहां उसका इलाज शुरू कर दिया गया है।
वन अधिकारियों के मुताबिक, भोला के एक पैर में गंभीर चोट है और शरीर के कई हिस्सों पर गहरे घाव मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई के दौरान किसी दूसरे नर बाघ से संघर्ष में वह घायल हुआ होगा। चोट के कारण वह शिकार करने में भी असमर्थ हो गया था, जिससे उसकी हालत लगातार कमजोर होती चली गई।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ पी.सी. आर्या ने बताया कि फाटो जोन में गश्त के दौरान वनकर्मियों ने पहली बार उसे लंगड़ाते हुए देखा था। इसके बाद उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। जब यह स्पष्ट हो गया कि बाघ की स्थिति गंभीर है, तब उच्च अधिकारियों की अनुमति लेकर रेस्क्यू ऑपरेशन की योजना बनाई गई।
गुरुवार रात करीब 10 बजे भोला फाटो जोन में दिखाई दिया। विशेषज्ञों की टीम ने मौके का फायदा उठाते हुए उसे सुरक्षित तरीके से बेहोश किया और ढेला रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया। पूरा ऑपरेशन बेहद सावधानी और तय प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ वन्यजीव पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा ने बताया कि फिलहाल बाघ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उपचार पूरा होने और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे दोबारा जंगल में छोड़ने की तैयारी की जाएगी।



