रिपोर्ट: संजय कुंवर
विश्व प्राकृतिक धरोहर नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में आयोजित दशकीय जैव विविधता अनुश्रवण अभियान-2026 ने हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई है। 21 दिनों तक चले इस वैज्ञानिक अभियान में विशेषज्ञों ने हिमनदों, वनस्पतियों और वन्यजीवों का विस्तृत अध्ययन किया।
शोध दल ने लाता गांव से लेकर सरसों पाताल तक के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों की मदद से डेटा संग्रह किया। ड्रोन, जीआईएस, कैमरा ट्रैप और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों के जरिए हिमनदों, मोरेन और हिमरेखा में हो रहे बदलावों का वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार किया गया।
अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने हिमालयी बुग्यालों की वनस्पतियों, दुर्लभ औषधीय पौधों और वृक्षरेखा में हो रहे परिवर्तनों का भी विश्लेषण किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले पारिस्थितिक बदलावों को समझने में बेहद उपयोगी होंगे।
अभियान की एक खास उपलब्धि स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी रही। लाता गांव के ग्रामीणों के साथ संवाद कर पारंपरिक ज्ञान, संरक्षण गतिविधियों और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने माना कि स्थानीय लोगों का सहयोग नंदा देवी जैसे संवेदनशील क्षेत्र के संरक्षण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उत्तराखंड वन विभाग के अनुसार, अभियान से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़े आने वाले वर्षों में जैव विविधता संरक्षण, वन प्रबंधन और हिमालयी पर्यावरण संरक्षण की नीतियों को और मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी संदर्भ प्रदान करेगा।



