रिपोर्टर: सचिन कुमार
देहरादून: कभी अपनी खास खुशबू और बेहतरीन स्वाद के लिए दुनिया भर में मशहूर रही दून बासमती अब एक बार फिर वापसी की राह पर है। उत्तराखंड सरकार, जिला प्रशासन और किसानों की संयुक्त पहल से इस पारंपरिक धान की खेती को दोबारा बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले साल के सफल ट्रायल के बाद इस वर्ष खेती का दायरा बढ़ाकर 75 हेक्टेयर कर दिया गया है।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के अनुसार, इस साल जिले के करीब 160 किसान दून बासमती की खेती कर रहे हैं। पहले यह पहल सहसपुर और विकासनगर तक सीमित थी, लेकिन अब रायपुर और डोईवाला के किसान भी इससे जुड़ रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य दून बासमती को उसकी पुरानी पहचान दिलाना और किसानों की आय बढ़ाना है।
पिछले वर्ष किए गए ट्रायल में किसानों से 200 क्विंटल से अधिक धान ₹65 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था। इसके लिए 13 लाख रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी गई। इससे किसानों का भरोसा बढ़ा और इस साल खेती का रकबा भी बढ़ गया।
दून बासमती के संरक्षण के लिए विकासनगर में सीड बैंक और आधुनिक टेस्टिंग सुविधा विकसित की जा रही है। इसके साथ ही बीज संरक्षण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी विशेष काम किया जा रहा है ताकि किसानों को बेहतर बाजार मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान लगातार जारी रहा तो आने वाले वर्षों में दून बासमती फिर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकती है। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि उत्तराखंड की कृषि विरासत भी संरक्षित होगी।



