Friday, October 23, 2026
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उत्तराखंड ने जियोथर्मल ऊर्जा की दिशा में बढ़ाया बड़ा कदम, तपोवन से शुरू होगी नई ऊर्जा क्रांति

रिपोर्टर: सचिन कुमार

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य को स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी 2025 लागू कर दी है। इस नीति के जरिए हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद प्राकृतिक गर्म जल स्रोतों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन और अन्य आधुनिक जरूरतों के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह पहल भविष्य में राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।

इस नीति के तहत चमोली जिले के तपोवन में 10 मेगावाट क्षमता की पायलट जियोथर्मल परियोजना के लिए अन्वेषण कार्य शुरू हो चुका है। विशेषज्ञ अब यह अध्ययन करेंगे कि यहां मौजूद प्राकृतिक गर्म जल स्रोतों से कितनी ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है और इसका व्यावसायिक उपयोग किस स्तर तक संभव है।

जियोथर्मल ऊर्जा धरती के भीतर मौजूद प्राकृतिक गर्मी से प्राप्त होती है। इस ऊर्जा का उपयोग केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि हीटिंग, कूलिंग, कृषि, पर्यटन और जल शुद्धिकरण जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश वर्षों से इस तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रहे हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि उत्तराखंड में मौजूद प्राकृतिक गर्म जल स्रोतों का वैज्ञानिक उपयोग करने से ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। यह परियोजना स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है।

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लिया गया दूरदर्शी फैसला बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड इस क्षेत्र में देश के लिए नई मिसाल पेश करेगा और आने वाले समय में यह योजना राज्य के विकास की नई पहचान बनेगी।

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