चमोली: स्वच्छ भारत मिशन के तहत चमोली जिले की ग्राम पंचायतों में स्थापित कूड़ेदान अब अपनी उपयोगिता खोते नजर आ रहे हैं। गांवों से नियमित रूप से कचरा नहीं उठाए जाने के कारण अधिकांश कूड़ेदान भर चुके हैं और उनमें सड़ रहे कचरे से आसपास का माहौल दूषित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छता की यह व्यवस्था अब उनके लिए नई समस्या बन गई है।
जिले के नौ विकासखंडों में कूड़ा वाहन और सेग्रिगेशन सेंटर की व्यवस्था होने के बावजूद गांवों से कचरा समय पर नहीं पहुंच रहा। नारायणबगड़ के पंती स्थित कॉम्पेक्टर सेंटर तक कचरा पहुंचाने की प्रक्रिया कागजों में तो मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था लगभग निष्क्रिय दिखाई देती है।
ग्रामीणों के मुताबिक कूड़ेदानों से उठने वाली दुर्गंध के कारण राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बंदर भी कूड़ेदानों से कचरा निकालकर सड़कों पर फैला रहे हैं, जिससे गंदगी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह समस्या स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी का दावा है कि रोस्टर के अनुसार कूड़ा उठाया जा रहा है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी की जाती है। वहीं जिला पंचायत राज अधिकारी रमेश चंद्र त्रिपाठी ने स्वीकार किया कि क्षेत्र पंचायत स्तर पर कूड़ा परिवहन की व्यवस्था कमजोर है, जिसे जल्द सुधारने के प्रयास किए जाएंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने स्वच्छता के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन व्यवस्थाओं के अभाव में पूरा सिस्टम प्रभावी नहीं बन पाया। अब लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।



