रिपोर्टर: ललित जोशी
नैनीताल: कुमाऊँ विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के सक्रिय आंदोलनकारी नरेंद्र सिंह रजवार के आकस्मिक निधन से विश्वविद्यालय परिवार और राज्य आंदोलनकारियों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में कर्मचारी, आंदोलनकारी और शुभचिंतक उनके आवास पहुंचे तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
नरेंद्र सिंह रजवार लंबे समय तक कुमाऊँ विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ का नेतृत्व करते रहे। कर्मचारियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए उन्होंने लगातार संघर्ष किया और अपने नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। विश्वविद्यालय कर्मचारियों के बीच उनकी पहचान एक संघर्षशील, सरल और कर्मठ नेता के रूप में रही।
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में भी नरेंद्र सिंह रजवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्ष 1994 के आंदोलन के दौरान उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई और राज्य आंदोलनकारी के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके योगदान को आज भी आंदोलन से जुड़े लोग सम्मान के साथ याद करते हैं।
कर्मचारी नेता गोपाल कपिल ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि नरेंद्र सिंह रजवार का निधन उनके लिए व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि रजवार ने जीवनभर विश्वविद्यालय कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और अपने अथक प्रयासों से कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दिलाईं।
गोपाल कपिल ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने केवल एक वरिष्ठ नेता ही नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक गुरु, मार्गदर्शक और स्नेही मित्र को खो दिया है। उनका संघर्ष, सादगी, नेतृत्व क्षमता और कर्मचारियों के प्रति समर्पण हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
नरेंद्र सिंह रजवार के निधन पर विश्वविद्यालय कर्मचारियों, राज्य आंदोलनकारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को सदैव याद रखने की बात कही।



